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CENTENARY YEAR OF UNIVERSITY OF DELHI
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उच्चतम शैक्षणिक मानकों पर खरा उतरता अंतर्राष्ट्रीय ख्याति-लब्ध दिल्ली विश्वविद्यालय अपना १००वां वर्ष मना रहा है। मानवीय मूल्यों के प्रति अडिग भाव विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य 'निष्ठा धृति सत्यम्' में परिलक्षित होता है।तीन कॉलेजों और ७५० छात्रों के साथ प्रारम्भ हुआ १९२२ ईस्वी में स्थापित दिल्ली विश्वविद्यालय(दक्षिणी परिसर के साथ)अब १६ संकायों, ८० से अधिक शैक्षणिक विभागों, ९१ कॉलेजों और ५५० से अधिक अध्ययन विषयों में रत लगभग आठ लाख छात्रों(जिनमें ७५ देशों के लगभग २,००० विदेशी छात्र सम्मिलित हैं) के साथ भारत का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय-वटवृक्ष है। प्रथम कुलपति सर हरि सिंह गौड़ से अद्यतन प्रो योगेश सिंह तक के १०० वर्षीय यात्रा में दिल्ली विश्वविद्यालय ने जहाँ एक ओर २ नोबेल पुरस्कृतों को देखा तो दूसरी ओर विश्व को आठ राष्ट्राध्यक्ष, सैकड़ों संसद -विधायिका के सदस्य, शीर्ष १०० फॉर्च्यून कंपनियों के सीईओ, असीमित संख्या में साहित्यकार, वैज्ञानिक, फिल्मी सितारे, कला-संस्कृति के पारखी और खिलाड़ी प्रद्दत किया है। Internationally renowned for high academic standards, University of Delhi is celebrating its centennial year in 2022. The unshakable attitude towards human values is reflected in the University's motto 'Nishtha Dhriti Satyam'. The University that started with three Colleges and 750 students, in the year 1922 has now spread with its South Campus to 16 faculties, more than 80 academic departments, 91 colleges and over 550 study programmes. It is the largest university in India with about eight lakh students (including about 2,000 foreign students from 75 countries). In its 100-year journey from the first Vice Chancellor Sir Hari Singh Gaur to the present one Prof. Yogesh Singh, the University of Delhi has witnessed two Nobel Prize winners on the one hand, while producing eight Heads of State, hundreds of legislature members, CEOs of top 100 Fortune companies and an unlimited number of litterateurs, scientists, film stars, art-culture connoisseurs and sportspersons.